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#news #न्यूज़ #उत्तरप्रदेश
news - कर्नलगंज में खुलेआम अवैध मीट दुकानों का साम्राज्य- प्रशासन मौन, जनता परेशान टाइम्स ऑफ जनसत्ता / लवकुश कुमार गोण्डा  परवेज चिकन  जिले के कर्नलगंज कस्बे में अवैध रूप से गोण्डा a संचालित मीट , मछली और अंडे की दुकानों ने प्रशासनिक  के प्रमुख व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। कस्बे चौराहों, धार्मिक स्थलों और विद्यालयों के पास खुलेआम से गंदगी, दुर्गंध और अस्वच्छता चल रही इन दुकानों  का माहौल पैदा हो गया है, जिससे स्थानीय निवासियों में है?" स्थानीय लोगों ने कई बार भारी रोष है। शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन अब கள 31 Hf க पास   अवैध तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। दुकानें - आदेशों  की उड़़ रही धच्चियाँ सूत्रों के अनुसार प्रशासनिक उदासीनता और मौन ने कंपोजिट विद्यालय बालकरामपुरवा , गायत्री मंदिर के पास, संदेह पैदा कर दिया है कि आखिर सकरौरा चौराहा, सुक्खापुरवा मोड़ सहित कई स्थानों पर यह अवैध कारोबार किसके संरक्षण के मीट व मछली की दुकानें में फल-फूल रहा है? क्षेत्रवासियों बिना लाइसेंस व 3139/ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द अवैध  संचालित हो रही हैं। यह स्थिति तब है जबकि शासनादेश  को हटाया दुकानों के अनुसार विद्यालय, धार्मिक स्थल, आबादी क्षेत्र और नहीं गया तोवे धरना- प्रदर्शन व आंदोलन करने को बाध्य सार्वजनिक स्थलों से निर्धारित दूरी पर ऐसे कारोबार  होंगे। ऐसे में सवाल यह उठता है कि॰क्या सरकार के पूर्णतः प्रतिबंधित हैं। आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित हैं? आखिर किसकी दुर्गंध और गंदगी से राहगीर परेशान - आवागमन  शह पर यह अवैध कारोबार चल रहा है। मासूम बच्चों दूभर दिन भर खुले में काटा जा रहा मीट, बहता  श्रद्धालुओं और आम जनता की भावना और स्वास्थ्य की तक खून, सड़ती मछली की दुर्गंध और नालियों का अंबार किसी को चिंता क्यों नहीं ? कर्नलगंज में स्थिति सा़फ कह इलाके में दुर्गंध फैला रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है रही है कि " यहाँ कानून नहीं , बल्कि अवैध मीट कारोबारियों कि " जहाँ बच्चे पढने जाते हैं और श्रद्धालु पूजा करने , वहीं का राज चलता है। " अब देखना यह है कि प्रशासन जागेगा कुछ कदम दूर कत्ल और दुर्गंध क्या यही कानून व्यवस्था  या फिर जनता के सब्र का बांध टूटेगा। कर्नलगंज में खुलेआम अवैध मीट दुकानों का साम्राज्य- प्रशासन मौन, जनता परेशान टाइम्स ऑफ जनसत्ता / लवकुश कुमार गोण्डा  परवेज चिकन  जिले के कर्नलगंज कस्बे में अवैध रूप से गोण्डा a संचालित मीट , मछली और अंडे की दुकानों ने प्रशासनिक  के प्रमुख व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। कस्बे चौराहों, धार्मिक स्थलों और विद्यालयों के पास खुलेआम से गंदगी, दुर्गंध और अस्वच्छता चल रही इन दुकानों  का माहौल पैदा हो गया है, जिससे स्थानीय निवासियों में है?" स्थानीय लोगों ने कई बार भारी रोष है। शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन अब கள 31 Hf க पास   अवैध तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। दुकानें - आदेशों  की उड़़ रही धच्चियाँ सूत्रों के अनुसार प्रशासनिक उदासीनता और मौन ने कंपोजिट विद्यालय बालकरामपुरवा , गायत्री मंदिर के पास, संदेह पैदा कर दिया है कि आखिर सकरौरा चौराहा, सुक्खापुरवा मोड़ सहित कई स्थानों पर यह अवैध कारोबार किसके संरक्षण के मीट व मछली की दुकानें में फल-फूल रहा है? क्षेत्रवासियों बिना लाइसेंस व 3139/ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द अवैध  संचालित हो रही हैं। यह स्थिति तब है जबकि शासनादेश  को हटाया दुकानों के अनुसार विद्यालय, धार्मिक स्थल, आबादी क्षेत्र और नहीं गया तोवे धरना- प्रदर्शन व आंदोलन करने को बाध्य सार्वजनिक स्थलों से निर्धारित दूरी पर ऐसे कारोबार  होंगे। ऐसे में सवाल यह उठता है कि॰क्या सरकार के पूर्णतः प्रतिबंधित हैं। आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित हैं? आखिर किसकी दुर्गंध और गंदगी से राहगीर परेशान - आवागमन  शह पर यह अवैध कारोबार चल रहा है। मासूम बच्चों दूभर दिन भर खुले में काटा जा रहा मीट, बहता  श्रद्धालुओं और आम जनता की भावना और स्वास्थ्य की तक खून, सड़ती मछली की दुर्गंध और नालियों का अंबार किसी को चिंता क्यों नहीं ? कर्नलगंज में स्थिति सा़फ कह इलाके में दुर्गंध फैला रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है रही है कि " यहाँ कानून नहीं , बल्कि अवैध मीट कारोबारियों कि " जहाँ बच्चे पढने जाते हैं और श्रद्धालु पूजा करने , वहीं का राज चलता है। " अब देखना यह है कि प्रशासन जागेगा कुछ कदम दूर कत्ल और दुर्गंध क्या यही कानून व्यवस्था  या फिर जनता के सब्र का बांध टूटेगा। - ShareChat

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