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#✍गुलजारांचे साहित्य #🖋शेरो-शायरी #📝कविता / शायरी/ चारोळी
✍गुलजारांचे साहित्य - लापरवाही ही भली थी 64,, जब भी परवाह की तो लोग सस्ता समझने लगे | @7o' लापरवाही ही भली थी 64,, जब भी परवाह की तो लोग सस्ता समझने लगे | @7o' - ShareChat

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