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#✍️ अनसुनी शायरी
✍️ अनसुनी शायरी - "हमेशा हम ही नहीं जाते भगवान के द्वार, कभी-कभी वो भी किसी रूप में हमसे मिलने आते हैं। " "हमेशा हम ही नहीं जाते भगवान के द्वार, कभी-कभी वो भी किसी रूप में हमसे मिलने आते हैं। " - ShareChat

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