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जय हनुमान - चातुर्थिक ज्वर, संताप ्ज्वर, विषम ज्वर, ताप-्ज्वर माहेश्वर वैष्णव ज्वरान् छिन्दि छिन्दि यक्ष ब्रह्म राक्षस भूत प्रेत पिशाचान् उच्चाटय उच्चाटय स्वाहा।  ऊँ ह्रां ह्रीं ऊँ नमो भगवते श्रीमहा हनुमते ऊँ ह्रां ह्रीं ह्ूं ह्रैं ह्रौं ह्रः आं हां हां हां हां  ऊँ सौं एहि एहि ऊँ हं ऊँ हं ऊँ हं ऊँ हं नमो भगवते श्रीमहा ्हनुमते श्रवण चक्षर्भूतानां  30 शाकिनी डाकिनीनां विषम दुष्टानां सर्व-विषं हर हर भेदय भेदय छेदय छेदय मारय मारय 34# आकाश शोषय शोषय मोहय मोहय ज्वालय ज्वालय प्रहारय प्रहारय शकल ्मायां भेदय भेदय स्वाहा। ऊँ ह्रां ह्रीं ऊँ नमो भगवते महा ्हनुमते सर्व ग्रहोच्चाटन " परबलं क्षोभय क्षोभय सकल-बंधन मोक्षणं कुर-कुरु  থাি২:-থুল ঘুল্স-থুল সন-থুলান্নিমুলব নিমুলব  नागपाशानन्त वासुकिन्तक्षक कर्कोटकालियान् यक्ष कुल ्जगत रात्रिञ्चर दिवाचर सर्पान्निर्विषं कुरु॰कुरु स्वाहा। ऊँ ह्रां ह्रीं ऊँ नमो भगवते महा ्हनुमते राजभय चोरभय पर्मन्त्रपर्यन्त्र पर्तन्त्र पर विद्याश्छेदय छेदय सर्व-शत्रून्नासय  नाशय असाध्यं साधय साधय हुं फट् स्वाहा। ।इति विभीषणकृतं हनुमद् वडवानल स्तोत्रं। ।  న  चातुर्थिक ज्वर, संताप ्ज्वर, विषम ज्वर, ताप-्ज्वर माहेश्वर वैष्णव ज्वरान् छिन्दि छिन्दि यक्ष ब्रह्म राक्षस भूत प्रेत पिशाचान् उच्चाटय उच्चाटय स्वाहा।  ऊँ ह्रां ह्रीं ऊँ नमो भगवते श्रीमहा हनुमते ऊँ ह्रां ह्रीं ह्ूं ह्रैं ह्रौं ह्रः आं हां हां हां हां  ऊँ सौं एहि एहि ऊँ हं ऊँ हं ऊँ हं ऊँ हं नमो भगवते श्रीमहा ्हनुमते श्रवण चक्षर्भूतानां  30 शाकिनी डाकिनीनां विषम दुष्टानां सर्व-विषं हर हर भेदय भेदय छेदय छेदय मारय मारय 34# आकाश शोषय शोषय मोहय मोहय ज्वालय ज्वालय प्रहारय प्रहारय शकल ्मायां भेदय भेदय स्वाहा। ऊँ ह्रां ह्रीं ऊँ नमो भगवते महा ्हनुमते सर्व ग्रहोच्चाटन " परबलं क्षोभय क्षोभय सकल-बंधन मोक्षणं कुर-कुरु  থাি২:-থুল ঘুল্স-থুল সন-থুলান্নিমুলব নিমুলব  नागपाशानन्त वासुकिन्तक्षक कर्कोटकालियान् यक्ष कुल ्जगत रात्रिञ्चर दिवाचर सर्पान्निर्विषं कुरु॰कुरु स्वाहा। ऊँ ह्रां ह्रीं ऊँ नमो भगवते महा ्हनुमते राजभय चोरभय पर्मन्त्रपर्यन्त्र पर्तन्त्र पर विद्याश्छेदय छेदय सर्व-शत्रून्नासय  नाशय असाध्यं साधय साधय हुं फट् स्वाहा। ।इति विभीषणकृतं हनुमद् वडवानल स्तोत्रं। ।  న - ShareChat

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