#📖 कविता
📖 कविता - कल एक झलक जिंदगी को देखा , वो राहों पे मेरी गुनगुना रही थी , फिर ढूँढा उसे इधर उधर वो आँख मिचौली कर मुस्कुरा रही थी , एक अरसे के बाद आया मुझे क़रार , वो सहला के मुझे सुला रही थी हम दोनों क्यूँ ख़फ़ा हैं एक दूसरे से मैं उसे और वो मुझे समझा रही थी , मैंने पूछ लिया - क्यों इतना दर्द दिया कमबख़्त तूने , वो हँसी और बोली - मैं ज़िंदगी हूँ तुझे जीना सिखा रही थी . . . . . ! ! - ShareChat
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1 महीने पहले
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