शादी की सालगिरह आज, उठा लेखनी कुछ ऐसा काम कर रहा हूँ, कुछ छन्द, हे जीवनसंगिनी ! तेरे नाम कर रहा हूँ । ऋतुओं में सबसे ऊपर ऋतुराज हो तुम, कल और आज में, मेरा आज हो तुम। पल-पल मेरा कितना ख्याल रखती हो, संग-संग मात-पिता और बेटों की संभाल करती हो। लौट कर ना आऊं तो करती हो मेरा इंतज़ार, ज़रा सी देर लगे तो, हाय ! वो आंसुओं की बौछार । तीज-त्यौहार-रस्म और सारे व्रत निभाती हो, सब रिश्ते-नातों में, सुख-दुःख की तुम सच्ची साथी हो। कवि ‘मुकेश’ लिख रहा हूँ ‘दीवाना’ खुद को, वाह! क्या शौहर पाया है, ये कहेगा जमाना तुझको #💐 सालगिरह❤ #👌 अच्छी सोच👍 #🌞 Good Morning🌞 #💖मेरी प्यारी पत्नी #💑 पति ❤पत्नि
💐 सालगिरह❤ - ShareChat
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1 महीने पहले
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