#📖 कविता #✍️अल्फ़ाज़✍️ #💔 दर्द-ए-दिल
📖 कविता - ' आज भी तेरे लिए दिल में चाहतें बाकी हैं । तुझसे जो करनी थी वो बातें बाकी हैं । कैसे सोच लिया तुमने हमे तेरी तलब नहीं दिल में उतर के देख अब भी तेरी आरजू बाकी हैं । कभी फुरसत मिले तो आ कर देख मेरे मकान में । आज भी तेरी ख़ुशबू , तेरी परछाइयां , तेरी चाहतें बाकी हैं । देख मेरा सब्र के मैं टूट कर भी बिखरा नहीं आँख में आँसू हैं मगर लब पर मुस्कुराहटें बाकी हैं । आर के - ShareChat
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1 महीने पहले
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