🎙 स्वरचित साहित्य - कल शीशा था सब देख देख कर जाते थे आज टूट गया सब बच बच कर जाते है _ _ ये वक्त है . . . साहब दिन सब के आते है . . Ravi prakash - ShareChat
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1 महीने पहले
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