📝कविता - | कविता वो दिन बहुत याद आते हैं । जव रोज स्कुल जाते थे । दोस्तों के सँग त - खेलते । पूरा दिन बिताते थे । रोज स्कूल से बचने का क्या बहाना होता था । फिर सस्म - पापा की डांट सुनकर स्कूल जाना ही होता था । कक्षा में प्रथम आने की होड़ लगी रहती थी । पहले बैंच पर बैठने के लिए जंता चिड़ी रहती थी । ना कोई बैंशन था , ना कोई बोझ था । बेफिकी का जीवन जीने का सना ही कुछ और था । आज ना स्कुल के दिन भूला नहीं जाते हैं । सचमुच वो दिन बहुत याद आते हैं । By Kiran Bach ' s - ShareChat
189 जणांनी पाहिले
1 वर्षांपूर्वी
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मला ही पोस्ट रिपोर्ट करावी वाटते कारण ही पोस्ट...
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