कोई भी बाहर का डाक्टर राजस्थान में आकर डाक्टर की दुकान नहीं खोल सकता क्यों? 😉😉 क्योंकि राजस्थान के मरीज की बिमारी राजस्थान के डाक्टर के अलावा कोई समझ ही नहीं सकता जैसे :- "जांण कियाँ कियाँ लागै है" "जी दुःख पावै हैं" "डील टूटे है" "माथो मैं भचीड़ सो लागै हैं" "पेट मैं घल्ड घल्ड हुअ हैं" "धाँसी आवै है" "दाँत कुळ है" "गोडा दुखः है" "होब्ल्डा आवै है" "हबड़क सी आवे है" "भुंवाली सी आवै है" "शरीर लाल तातो हुग्यो हैं" "कान में सांय सांय होरी है "माथो भन्नावै है" "कालज्या में बळत सी लागे" "जी सोरो कोनी" "गलदवायी सी हुरी है" ऐसी ऐसी बीमारी सुनकर अच्छे अच्छे MBBS को अपनी डिग्री पर शक हो जाता है कि साला कहीं ये चेप्टर छूट तो नहीं गया था।।। 😀😀😀
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3 months ago
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