✒ शायरी - दुआ मांगी थी आशियाँने की , चल पड़ी आंधियाँ जमाने की , मेरा दर्द कोई नहीं समझ पाया , क्योंकि मेरी आदत थी मुस्कुराने की । - ShareChat
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1 महीने पहले
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