📅 તાજા સમાચાર - केंद्र की 10 एजंसियों की सूची वाले अध्यादेश पर स्पष्टीकरण किसी भी कंप्यूटर निगरानी के लिए लेनी होगी मंजूरी गृह मंत्रालय अधिकार पहले से ही थे •हर मामले में गृह मंत्रालय एवं राज्य सरकारों यूपीए के वक्त निगरानी मामलों से लेनी होगी पूर्व स्वीकृति बने थे नियम में कमी आई है जनसत्ता ब्यूरो नई दिल्ली , 30 दिसंबर । सरकार का कहना है कि गृह मंत्रालय के मुताबिक कंप्यूटर की निगरानी के बारे में हालिया कंप्यूटर डेटा हासिल 2014 की तुलना में प्रावधानों को लेकर मचे सियासी बावेला के बाद करके जानकारी लेने और निगरानी के मामलों में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रविवार को इस बारे में इसकी निगरानी करने के गिरावट आई है , जबकि देश सफाई दी है । गृह मंत्रालय ने कहा कि केंद्र नियम 2009 में उस गृह मंत्रालय के मुताबिक , अधिसूचना में बताई गई में मोबाइल फोन कनेक्शन सरकार ने किसी भी जांच एवं प्रवर्तन एजंसी को समय बनाए गए थे , जब दस एजंसियों को 2011 से इलेक्ट्रॉनिक संचारों बढ़कर लगभग 120 करोड़ इस बारे में ' पूर्ण शक्ति ' नहीं दी है । अपनी कांग्रेस नीत यूपीए सत्ता में । को बीच में रोककर जानकारी हासिल करने के हो गए हैं । इस लिहाज से कार्रवाई में जांच एजेंसियों को मौजूदा नियमों का थी और उसके नए आदेश अधिकार पहले से ही थे । मंत्रालय ने 2011 की इलेक्ट्रॉनिक संदेशों की ही पालन करना होगा । इसके तहत उन्हें हर बार में केवल उन एजेंसियों के ' आदर्श परिचालन प्रक्रियाओं ' को दोहराया , संख्या में भी तेजी से पूर्व मंजूरी लेनी होगी । नाम बताए हैं , जो इस जिसमें कहा गया कि ऐसे हर ' इंटरसेप्ट ' के लिए बढोतरी हई है । उपभोक्ता गृह मंत्रालय के बयान के मुताबिक , ' आइटी तरह का कदम उठा संबंधित प्राधिकार ( केंद्रीय गृह सचिव या राज्य बढे हैं , जबकि निगरानी में एक्ट , 2000 में पर्याप्त कदम उठाए गए हैं और सकती हैं । गृह सचिव ) से पूर्व मंजूरी की जरूरत होगी । टेलीग्राफ एक्ट में भी मिलते - जुलते प्रावधान हैं । काफी गिरावट आई है । हर मामले में गृह मंत्रालय एवं राज्य सरकारों से पूर्व मंजूरी की जरूरत होगी । गृह मंत्रालय ने एजंसियों को कंप्यूटर की हर तरह की निगरानी गृह सचिव या राज्य गृह सचिव ) से पूर्व मंजूरी किसी भी कानून एवं प्रवर्तन एजंसी को विशेष का अधिकार दिया गया है । इस अधिसूचना पर की जरूरत होगी । मंत्रालय ने 10 एजंसियों अधिकार नहीं दिए हैं । ' विपक्ष ने सरकार पर निगरानी राज्य बनाने की खुफिया ब्यूरो , नॉरकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो , प्रवर्तन गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि कोशिश करने का आरोप लगाया था । निदेशालय , आयकर विभाग , राजस्व खुफिया कंप्यूटर से जानकारी निकालने ( इंटरसेप्ट ) को गृह मंत्रालय के मुताबिक , अधिसूचना में निदेशालय , केंद्रीय जांच ब्यूरो , राष्ट्रीय जांच लेकर कोई नया नियम - कानून , नई प्रक्रिया , नई बताई गई दस एजेंसियों को 2011 से इलेक्ट्रॉनिक एजंसी , रॉ , डायरेक्टोरेट ऑफ सिग्नल इंटेलिजेंस एजंसी , पूर्ण शक्ति या पूर्ण अधिकार जैसा कुछ संचारों को बीच में रोककर जानकारी हासिल ( जम्मू - कश्मीर , पूर्वोत्तर और असम ) एवं दिल्ली नहीं है । जांच एवं प्रवर्तन एजंसियों के लिए नियमों करने के अधिकार पहले से ही थे । मंत्रालय ने पुलिस के नामों की सूची जारी की है । इन में कोई फेरबदल नहीं किया गया है । गृह मंत्रालय 2011 की ' आदर्श परिचालन प्रक्रियाओं को एजंसियों को आइटी एक्ट , 2000 की धारा 69 के ने 20 दिसंबर की अधिसूचना में 10 एजेंसियों का दोहराया , जिसमें कहा गया कि इस तरह के हर तहत कंप्यूटर से जानकारी निकालने और निगरानी नाम जारी किया था और कहा था कि उन ' इंटरसेप्ट ' के लिए संबंधित प्राधिकार ( केंद्रीय के अधिकार दिए गए थे । Banking Academy 31 Dec . 2018 - ShareChat
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હું આ પોસ્ટની ફરિયાદ કરવા માંગુ છુ, કારણકે આ પોસ્ટ...
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