पत्ता-पत्ता बूटा-बूटा हाल हमारा जाने है जाने न जाने गुल ही न जाने, बाग़ तो सारा जाने है लगने न दे बस हो तो उस के गौहर-ए-गोश के बाले तक उस को फ़लक चश्म-ए-मै-ओ-ख़ोर की तितली का तारा जाने है आगे उस मुतक़ब्बर के हम ख़ुदा ख़ुदा किया करते हैं कब मौजूद् ख़ुदा को वो मग़रूर ख़ुद-आरा जाने है आशिक़ सा तो सादा कोई और न होगा दुनिया में जी के ज़िआँ को इश्क़ में उस के अपना वारा जाने है चारागरी बीमारी-ए-दिल की रस्म-ए-शहर-ए-हुस्न नहीं वर्ना दिलबर-ए-नादाँ भी इस दर्द का चारा जाने है क्या ही शिकार-फ़रेबी पर मग़रूर है वो सय्यद बच्चा त'एर उड़ते हवा में सारे अपनी उसारा जाने है मेहर-ओ-वफ़ा-ओ-लुत्फ़-ओ-इनायत एक से वाक़िफ़ इन में नहीं और तो सब कुछ तन्ज़-ओ-कनाया रम्ज़-ओ-इशारा जाने है क्या क्या फ़ितने सर पर उसके लाता है माशूक़ अपना जिस बेदिल बेताब-ओ-तवाँ को इश्क़ का मारा जाने है आशिक़ तो मुर्दा है हमेशा जी उठता है देखे उसे यार के आ जाने को यकायक उम्र दो बारा जाने है रख़नों से दीवार-ए-चमन के मूँह को ले है छिपा य'अनि उन सुराख़ों के टुक रहने को सौ का नज़ारा जाने है तशना-ए-ख़ूँ है अपना कितना 'मीर' भी नादाँ तल्ख़ीकश दमदार आब-ए-तेग़ को उस के आब-ए-गवारा जाने है
142 जणांनी पाहिले
1 महिन्यांपूर्वी
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काढून टाका
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मला ही पोस्ट रिपोर्ट करावी वाटते कारण ही पोस्ट...
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