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📚 कैसे मुसलमानो को #फिरको में बाटा गया ! 📚 हिंदुस्तान में अंग्रेजो के आने से पहले सब सुन्नी मुसलमान ही थे , कोई गिरोह बंदी कोई जमात नही थी ! ( हिस्ट्री उठा के देख लो ) अंग्रेज़ एक जिज्ञासु कौम है वो करामत में नही बल्कि टेकनोलोजी में विश्वास करती है और भारत वासी टेक्नोलॉजी से जियादा करामत में विश्वास करते है ! ( चाहे किसी भी कौम का हो , यहाँ आस्था के आगे सब फैल ) अंग्रजो ने मुसलमानो के किताबो पर #कुरान और #हदीसो पर पहले से ही रिसर्च शुरू की थी और उन्होंने रिसर्च में ये पाया कि की मुसलमानो को तोड़ना , कमजोर करना आसान नही है बल्कि नामुमकिन है ! अब अंग्रजो ने अपनी नई चाल चलना शुरू की मुसलमानो के बिकाऊ मुल्लो की खरीदारी करने लगे , बंगला , गाड़ी , पैसा , औरत सब बिकाऊ मुल्लो को मिलने लगा , तो ईमान बेचने में कितना वक़्त लगता ? और बिकाऊ मुल्लो ने ईमान बेच दिया ! अंग्रेजो के हुक्म पर काम करने लगे शरीयत के कानून को तार तार कर दिया और विक्टोरिन हुकूमत में पहले फ़ितने की फैक्ट्री #मदरसा_ए_देवबंद बना ! मुसलमानो को तोड़ने , बिखरने के लिए नमाज़ , रोजा , हज , जकात पर इख़्तेलाफ़ नही हुआ क्यों ये फ़र्ज़ कामो में से है , और फ़र्ज़ कामो पर ऐतराज़ या इख़्तेलाफ़ नही हो सकता ! तो अब मुसलमानो को कैसे तोड़ा जाए ? कैसे उनको गुमराह किया जाए ? तो ऐसी बातों को ढूंढ के निकालो जिसमे इख़्तिलाफ़ हो , मुसलमान इसमे लड़ झगड़ के मर जाए या गुमराह हो जाए ! तो सब से पहले हमला अजमते मुस्तफा ( सल्ललाहु अलैही वसल्लम ) पर हुआ कि "" हुजूर को इल्मे गैब नही है "" ( हवाला : हिफजूल ईमान , सफा न 8 ) जो शख्स शैतान से जियादा हुजूर का इल्म माने वो मुशरिक है " ( हवाला : बराहेनुल कातिया , सफा न 273 ) " हुजूर को दीवार के पीछे का भी इल्म नही है "" ( माजल्लाह ) कुछ जाहिल मुसलमान बिकाऊ मुल्लो की दाढ़ी , टोपी , झुब्बे को देखकर धोखा खा गए " अरे ये तो मौलाना साहब कह रहे है आखिर ये सच ही होगा तभी तो कह रहे है "" हम तो जाहिल है कुरान और हदीस पढ़ने भी नही आती ! इसी सोच ने उस वक़्त के मुसलमानो को गुमराह किया था और आज भी यही सोच मुसलमानो को गुमराह कर रही है ! फिर हुजूर के खत्मे नुबूवत ( यानी आखिरी नबी होने पर ) पर हमला हुआ ! "" हुजूर के बाद भी कोई नबी आए तो हुजूर के खत्मे नुबूवत पर कोई असर नही होगा "" लिखने वाला देवबंदी आलिम खलील अहमद अंबेठवी ( हवाला :- तहजीरुनास , सफा न 14 ) हालांकि देवबंदी अपने आलिम को नबी बनाने की फिराक में थे कि इनकी ये इबारत पढ़कर उधर पंजाब अमृतसर से मिर्जा गुलाम अहमद कादियानी ने खुद के नबी होने का दावा किया ! अब देवबंदियो की चाल उल्टी पढ़ गयी ( उनको शऊर भी नही था कि मिर्जा गुलाम अहमद कादियानी बाज़ी मार जाएगा ) अब अपनी किताब में लिख तो दिया अब इस #हड्डी को ना निगल पा रहे ना उंगल पा रहे है ! फिर भी कादियानी से मुनाजरा कर लिया और बुरी तरह हार गए ! क्यों कि नबी आएगा ये इन्हीलोगो के किताब में लिखा था ! इसी तरह तरह धीरे धीरे बद मजहब , बद अक़ीदा लोगो ने अपने बातिल खयाल और अक़ीदे लोगो पर थोपने लगे ! हुजूर के मिलाद पर ऐतराज़ हुजूर के मेराज पर ऐतराज़ हुजूर के लामका जाने पर ऐतराज़ ये सिलसिला यही नही रुका बल्कि औलिया अल्लाह और बुजुर्गों पर भी हमले होने लगे , गौस की गौसियत पर हमला , ख्वाजा की खजगाही पर हमला होने लगा ! मुस्तहब कामो पर भी हमला शुरू कर दिया इन जालिमो ने ..... जैसे नियाज़ , फातेहा , दरूद , सलाम , चाद्दर , उर्स , मिलाद , जब इनसे भी लोगो को दूर ना कर सके तो आखरी #एटमबम डाला कि "" मज़ारों पर जाना शिर्क है , किसी का कत्ल और जीना करने से भी बुरा काम है ! हर तकरीर , हर इश्तेहार में इस झूठ को इतना फैलाया की पढ़े लिखे लोगो ने भी इन बिकाऊ मुल्लो की बातों को सच मान लिया ! आज भी इनके जमातों से ताल्लुख रखने वाले लोगो के मुँह से आप लोगो ने सुना होगा कि मज़ारों पर जाना शिर्क है ! इस तरह मुहम्मद मुस्तफा ( सल्ललाहु अलैही वसल्लम ) की भोली भेड़ो ( उम्मतियो ) को ईमान ये भेड़िये लूट ले गए ! पहले सब सुन्नी थे आज की हालात ऐसी है , बाप सुन्नी तो बेटा तब्लीगी , मामू देवबंदी , फूफा जमाती , खालू अहले हदीस , जीजा वहाबी , बन गए ! इसकी वजह क्या है ?? इसकी वजह ये है कि इन्होंने लोगो को अपने अक़ीदे से भटकाया गुमराह किया और इनके ईमान को लूट के इनको काफिर बना दिया ! नही तो मुजे बताओ कि इनको अहले सुन्नत वल जमात से हटकर अपने , अलग अलग फिरके बनाने की नौबत क्यों आयी ? इन लोगो की हिस्ट्री को देखो 150 / 200 साल से पहले इन ईमान चोरो का कोई नामो निशान नही था !
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इबादत

इबादत - Dawood ona SCENS988 be Kwa - ShareChat
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11 महीने पहले
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