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#भगवत गीता #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏कर्म क्या है❓
भगवत गीता - मय्येव मन आधत्स्व मयि बुद्धि निवेशय। निवसिष्यसि मय्येव अत ऊर्ध्वन संशयः|| मुझमें मन को लगा और मुझमें ही बुद्धि को लगा , इसके उपरान्त तू मुझमें ही निवास कॅरेगा , इसॅमें कुछ भी संशय नहींहि lall व्यख्याः इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्तों को भक्तियोग की राह पर चलने के लिए प्रेरितॅ कर रहे हैं।वे कहते हैं कि यदि आप अपने मन और बुद्धि को मुझमें पूर्ण रूप से समर्पित कर देंगे तो आप मुझमें स्थिरहो जाएगे। भगवान श्रीकृष्ण के अनुसार जिब् व्यक्ति अपने मन और बुद्धिको पूरी तरह से भगवान में लिप्त कर देता है तोउसकी ऑत्मा भगवान के साथ विलीन होजाती है औरवह परम शांतिकी प्राप्ति करता है। यह श्लोक हमें यह सिखाता है कि भगवान में पूरी तरह से समर्पित रहने से हमारे भीतर शाति और सुख का आगमन होता है। इस प्रकार  जब हम् भगवान की शरण में आत्म समर्पण करतेहैं और अपनी समस्त् क्षमताओं को उन्हीं में समर्पित कर देते हैं तोन केवल हमें आध्यात्मिक उन्नति मिलती है बल्कि जीवन की हर कठिनाई से भी उबरने की क्षमता प्राप्त होती हैl 4 संक्षेप मेंः भगवान श्रीकृष्ण श्लोकमे यह स्पष्ट किया है कि विश्वास जब हम पूरी श्रद्धा और के साथ अपने मन और बूद्रि का भगवान में लिप्त कर लेतेहैं तो हम उनकी कृपा प्राप्त करते हैं और हिमारे जीवन का हर पहल ऊर्ध्वगति की ओर अग्रसर होता 81 मय्येव मन आधत्स्व मयि बुद्धि निवेशय। निवसिष्यसि मय्येव अत ऊर्ध्वन संशयः|| मुझमें मन को लगा और मुझमें ही बुद्धि को लगा , इसके उपरान्त तू मुझमें ही निवास कॅरेगा , इसॅमें कुछ भी संशय नहींहि lall व्यख्याः इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्तों को भक्तियोग की राह पर चलने के लिए प्रेरितॅ कर रहे हैं।वे कहते हैं कि यदि आप अपने मन और बुद्धि को मुझमें पूर्ण रूप से समर्पित कर देंगे तो आप मुझमें स्थिरहो जाएगे। भगवान श्रीकृष्ण के अनुसार जिब् व्यक्ति अपने मन और बुद्धिको पूरी तरह से भगवान में लिप्त कर देता है तोउसकी ऑत्मा भगवान के साथ विलीन होजाती है औरवह परम शांतिकी प्राप्ति करता है। यह श्लोक हमें यह सिखाता है कि भगवान में पूरी तरह से समर्पित रहने से हमारे भीतर शाति और सुख का आगमन होता है। इस प्रकार  जब हम् भगवान की शरण में आत्म समर्पण करतेहैं और अपनी समस्त् क्षमताओं को उन्हीं में समर्पित कर देते हैं तोन केवल हमें आध्यात्मिक उन्नति मिलती है बल्कि जीवन की हर कठिनाई से भी उबरने की क्षमता प्राप्त होती हैl 4 संक्षेप मेंः भगवान श्रीकृष्ण श्लोकमे यह स्पष्ट किया है कि विश्वास जब हम पूरी श्रद्धा और के साथ अपने मन और बूद्रि का भगवान में लिप्त कर लेतेहैं तो हम उनकी कृपा प्राप्त करते हैं और हिमारे जीवन का हर पहल ऊर्ध्वगति की ओर अग्रसर होता 81 - ShareChat