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#ધર્મ અને અધ્યાત્મ #...જય‌ શ્રી રામ...
ધર્મ અને અધ્યાત્મ - श्री रामचरित मानस चौपाई I। अखिल विश्व यह मम उपजाया 1 सब पर मोहिं बराबर दाया {గ महं जो परिहरि मद माया भजहिं मोहिं मन वचन अरु काया II यह अखिल संसार मेरा उत्पन्न किया हुआ है और सब पर मेरी बराबर दया रहती है, उनमें जो भी जीव अभिमान और माया छोड़कर शरीर से मुझे भजते हैं मन, वचन और वे सेवक मुझे प्राणों के समान प्यारे हैं। श्री रामचरित मानस चौपाई I। अखिल विश्व यह मम उपजाया 1 सब पर मोहिं बराबर दाया {గ महं जो परिहरि मद माया भजहिं मोहिं मन वचन अरु काया II यह अखिल संसार मेरा उत्पन्न किया हुआ है और सब पर मेरी बराबर दया रहती है, उनमें जो भी जीव अभिमान और माया छोड़कर शरीर से मुझे भजते हैं मन, वचन और वे सेवक मुझे प्राणों के समान प्यारे हैं। - ShareChat