स्त्री इतनी सशक्त है…
कि उसकी मंगल कामना के लिए अलग से कोई व्रत नहीं बना,
क्योंकि वह स्वयं ही परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों के मंगल का व्रत बनकर जीती है।
वह केवल रिश्ते नहीं निभाती,
वह हर घर की शक्ति, हर संघर्ष की हिम्मत
और हर उम्मीद की शुरुआत होती है।
🙏🏻शुभ प्रभात 🙏🏻
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