ShareChat
click to see wallet page
search
#✍️ अनसुनी शायरी
✍️ अनसुनी शायरी - ف  यनमहे ?607 ो न्ध पुषिवर्धतना .  ا खामोशी को समझने वाले अगर मिल जाए तो, दुख भी बया करने की जरूरत नहीं पड़ती !   ف  यनमहे ?607 ो न्ध पुषिवर्धतना .  ا खामोशी को समझने वाले अगर मिल जाए तो, दुख भी बया करने की जरूरत नहीं पड़ती ! - ShareChat