ShareChat
click to see wallet page
search
#हार्दिक शुभकामनाएं 🌹🙏 महाशिवरात्रि पूजा के चार पहर और मुहूर्त का महत्व
हार्दिक शुभकामनाएं 🌹🙏 - महाशिवरात्रि २०२६ पहर के मुहूर्त और महत्व  चार विधि मुहूर्त पहर Hec पहरकी পুসা H হািন १५ फरवरी प्रथम पहर प्रथम डस जी का दूथ ओर  (6:11 PM7 পুসা पूजा मुख्य रूप जल थारासे 09.22 PM) सेसध्या काल (प्रदोष) में होती  अभिषक करना तक चाहिए। 6 पूजा में शिव  ये पूजा 7 द्वितीय पहर १५ फरवरी रात्रि इस जी का दही से (09:23 PM)7 के दूसरे भाग पूजा १६ फरवरी मेहोती हे। अभिषेक करना चाहिए। (2:34 PM) तक য পুসা १६ फरवरी इस समय मेशिव जी तृतीय पहर कोघी ओरजल अपित (२ 35 AM से मथ्यरात्रि के पूजा चाहिए साथही समय की 03.46 AM) करता जाती ह। शिव কা পাঠ মী स्तुति  तक करना चाहिए। 16 ಹ7ಾ1 इस समय मेशिव जी चतुर्थ पहर  ये पूजा मध्यरात्रि से ब्रह्म मुहूर्त तक  को शहद अपित करना (03:46AM পুসা चाहिए पूजा के बाट #06:59 AM) चलती ह। आरती की जाती है। तक शिव शक्ति के दिव्य मिलन का महापर्व महाशिवरात्रि हिद्ू धर्म की प्रमुख महानिशाओं मे से एक माना जाता हे। इस पावन रात्रि मे विशेय रूप से रान्रिकालीन पूजा का विधान हे जिसे चार पहरों म कि महाशिवराति के दिन चार पहर मे शिव वतः जप ओर सपन्न किया जाता हे मान्यत विधिपूर्वक पूजन करने से साधक को धर्म, अर्थ॰ काम ओर मोक्ष ( चार पुरुपार्थो ) की प्राप्ति  67 67@ महाशिवरात्रि २०२६ पहर के मुहूर्त और महत्व  चार विधि मुहूर्त पहर Hec पहरकी পুসা H হািন १५ फरवरी प्रथम पहर प्रथम डस जी का दूथ ओर  (6:11 PM7 পুসা पूजा मुख्य रूप जल थारासे 09.22 PM) सेसध्या काल (प्रदोष) में होती  अभिषक करना तक चाहिए। 6 पूजा में शिव  ये पूजा 7 द्वितीय पहर १५ फरवरी रात्रि इस जी का दही से (09:23 PM)7 के दूसरे भाग पूजा १६ फरवरी मेहोती हे। अभिषेक करना चाहिए। (2:34 PM) तक য পুসা १६ फरवरी इस समय मेशिव जी तृतीय पहर कोघी ओरजल अपित (२ 35 AM से मथ्यरात्रि के पूजा चाहिए साथही समय की 03.46 AM) करता जाती ह। शिव কা পাঠ মী स्तुति  तक करना चाहिए। 16 ಹ7ಾ1 इस समय मेशिव जी चतुर्थ पहर  ये पूजा मध्यरात्रि से ब्रह्म मुहूर्त तक  को शहद अपित करना (03:46AM পুসা चाहिए पूजा के बाट #06:59 AM) चलती ह। आरती की जाती है। तक शिव शक्ति के दिव्य मिलन का महापर्व महाशिवरात्रि हिद्ू धर्म की प्रमुख महानिशाओं मे से एक माना जाता हे। इस पावन रात्रि मे विशेय रूप से रान्रिकालीन पूजा का विधान हे जिसे चार पहरों म कि महाशिवराति के दिन चार पहर मे शिव वतः जप ओर सपन्न किया जाता हे मान्यत विधिपूर्वक पूजन करने से साधक को धर्म, अर्थ॰ काम ओर मोक्ष ( चार पुरुपार्थो ) की प्राप्ति  67 67@ - ShareChat