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!!जख्म दिल पर!! न हम रहे दिल लगाने के काबिल, न दिल रहा ग़म उठाने के काबिल, लगे उसकी यादों के जो ज़ख़्म दिल पर, न छोड़ा उसने मुस्कुराने के काबिल!! लेखक:-मनोज चौहान, 🌹✍️... #🌷..chauhan..💐🌺
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