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Mahendra Narayan
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3 दिन पहले
सिकुड़े - सिकुड़े दिन लगे, फैली - फैली रात । शर्मीली शामो सुबह, सर्दी की सौगात
#कविता
#👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺
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