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#✒️दर्द भरल शायरी स्टेटस कभी ऐसा भी वक्त आया… जब प्यास भी थी और पानी भी, पर हमने खुद को रोक लिया… क्योंकि इंसानियत, जरूरत से बड़ी थी। लेकिन अफसोस… गरीबी ने मुझे गलत समझा, और मैं गलत बनकर रह गया। — Anil Singhकभी ऐसा भी वक्त आया… जब प्यास भी थी और पानी भी, पर हमने खुद को रोक लिया… क्योंकि इंसानियत, जरूरत से बड़ी थी। लेकिन अफसोस… गरीबी ने मुझे गलत समझा, और मैं गलत बनकर रह गया। — Anil Singh
✒️दर्द भरल शायरी स्टेटस - कभी ऐसा भी वक्त आया, जब प्यास भी थी और पानी भी , पर हमने खुद को रोक लिया. क्यौकि इंसानियत , जररत से बड़ी थी ! লক্কিন ঔক্মীস इंसानियत की कीमत चुकानी पड़ी , ತಳೆ' गरीबी ने मुड़े गलत समड़ा , और मैं गलत बनकर रह गया ! ANILSINGH कभी ऐसा भी वक्त आया, जब प्यास भी थी और पानी भी , पर हमने खुद को रोक लिया. क्यौकि इंसानियत , जररत से बड़ी थी ! লক্কিন ঔক্মীস इंसानियत की कीमत चुकानी पड़ी , ತಳೆ' गरीबी ने मुड़े गलत समड़ा , और मैं गलत बनकर रह गया ! ANILSINGH - ShareChat