दहेज पर कविता
बेटी कितनी जल गई ,
लालच अग्नि दहेज ।
क्या जाने इस पाप से ,
कब होगा परहेज ।।
कब होगा परहेज ,
खूब होता है भाषण ।
बनते हैं कानून ,
नहीं कर पाते पालन ।।
कह ननकी कवि तुच्छ ,
. रिवाजों की बलि लेटी ।
बैठ मैके में बेटी
रहती है मायूस बेटी व।।
लेखक:-मनोज चौहान, 🌹✍️... #🌷..chauhan..💐🌺


