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#✍🏽 माझ्या लेखणीतून #🌹प्रेमरंग #🥰प्रेम कविता📝 #📝कविता / शायरी/ चारोळी #🖋शेरो-शायरी
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - विश्वगुरु  लोगों के हाथों का भविष्य बताता था फिर हाथ से ही नफरत हो गई गिर गया हूं खीचड़ मे खेलते खेलते और कमल से मोहब्बत हो गई था रोबोट मैने भी स्कूल में बनया मुझे अवॉर्ड भी मिल गया था लेकिन वो रोबोट भी मेरे जैसा ही नॉन बायोलॉजिकल था पैंतीस उम्र के बचपन में मैने कोलकाता की मेट्रो देखी है भीख मांगी चाय बेची तब जव लंडन पेरिस भी घूम के देखी है  ऐसी अजब गजब कहानी वेश  ತಷಾ #T ಫ है মুনানী  है दुनिया " 4 झुकती  झुकाने  दुनिया सारी पैरों में झुकानी है hansraj विश्वगुरु  लोगों के हाथों का भविष्य बताता था फिर हाथ से ही नफरत हो गई गिर गया हूं खीचड़ मे खेलते खेलते और कमल से मोहब्बत हो गई था रोबोट मैने भी स्कूल में बनया मुझे अवॉर्ड भी मिल गया था लेकिन वो रोबोट भी मेरे जैसा ही नॉन बायोलॉजिकल था पैंतीस उम्र के बचपन में मैने कोलकाता की मेट्रो देखी है भीख मांगी चाय बेची तब जव लंडन पेरिस भी घूम के देखी है  ऐसी अजब गजब कहानी वेश  ತಷಾ #T ಫ है মুনানী  है दुनिया " 4 झुकती  झुकाने  दुनिया सारी पैरों में झुकानी है hansraj - ShareChat