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#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - 46 0 हमसे मिलने में एक ख़राबी है फ़िर किसी और के नहीं रहोगे तुम | 46 0 हमसे मिलने में एक ख़राबी है फ़िर किसी और के नहीं रहोगे तुम | - ShareChat