आज निज घट भीतर फाग मचाइयों…
जब आत्मा में प्रभु का रंग घुल जाता है,
तो बाहर की होली फीकी लगती है।
यह रंग गुलाल का नहीं,
यह रंग प्रेम, भक्ति और चेतना का है।
जब भीतर की होली जलती है,
तो अहंकार भस्म हो जाता है
और आत्मा श्रीहरि के रंग में रंग जाती है।
आज मन नहीं,
आत्मा होली खेल रही है 🌺🌺
#🌺राधा कृष्ण💞
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