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#✍️ साहित्य एवं शायरी #📖 कविता और कोट्स✒️ #📓 हिंदी साहित्य
✍️ साहित्य एवं शायरी - मेरा जूता जगह-्जगह से फट गया है धरती चुभ रही है मैं रुक गया हूँ जूते से पूछता हूँ- 'आगे क्यूँ नहीं चलते?' जूता पलटकर जवाब देता है- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना 'मैं अब भी तैयार हूँ यदि तुम चलो! ' मैं चुप रह जाता हूँ कैसे कहूँ कि मैं भी जगह-जगह से फट गया हूँ। PAGE मेरा जूता जगह-्जगह से फट गया है धरती चुभ रही है मैं रुक गया हूँ जूते से पूछता हूँ- 'आगे क्यूँ नहीं चलते?' जूता पलटकर जवाब देता है- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना 'मैं अब भी तैयार हूँ यदि तुम चलो! ' मैं चुप रह जाता हूँ कैसे कहूँ कि मैं भी जगह-जगह से फट गया हूँ। PAGE - ShareChat