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#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - दुर्बल को न सताइए, जाकी मोटी हाय ! मुई खाल की श्वास सों ॰ सार भसम होय जाय !! अर्थात निर्बल का बल राम है ! निर्बल व्यक्ति सबकुछ क्षमा करता जाता है सहता चला जाता है ! लेकिन जिस क्षण उसकी तड़प आंसुओं का रूप ग्रहण करती है उसी क्षण से प्रकृति न्याय की प्रकिया आरंभ कर देती है ! दुर्बल को न सताइए, जाकी मोटी हाय ! मुई खाल की श्वास सों ॰ सार भसम होय जाय !! अर्थात निर्बल का बल राम है ! निर्बल व्यक्ति सबकुछ क्षमा करता जाता है सहता चला जाता है ! लेकिन जिस क्षण उसकी तड़प आंसुओं का रूप ग्रहण करती है उसी क्षण से प्रकृति न्याय की प्रकिया आरंभ कर देती है ! - ShareChat