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#भक्ति 💖
भक्ति 💖 - हे आदिशक्ति माँ सुन्दर नमन हे भक्ति स्वरूप युग की दृष्टि से हमारे वर्तमान काल में, मानव सृष्टि की अत्यंत गौरवशाली पृष्ठभूमि में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश है कि॰ परम ब्रह्म के परम प्रकाश, निराकार आदिशक्ति माँ का परम प्राकट्य - 771977 7, छत्तीसगढ़ के पत्थलगांव में , श्री सुधाकर जी में शक्ति स्वरूप के रूप में , एवं छत्तीसगढ़ के किरारी ड में, श्री बासुदेव जी में भक्ति स्वरूप के रूप में हुआ है। शक्ति स्वरूप श्री सुधाकर जी में परमात्मा के प्राकट्य से उनका परम तेज एवं महिमा इतनी प्रखर थी कि॰ की सुन्दर जन-सामान्य भी इस महान भक्ति शरण को प्राप्त कर धन्य हो सकें - इसी उद्देश्य से उन्हीं माँ का परम प्राकट्य किरारी ड के श्री बासुदेव जी में भक्ति स्वरूप के रूप में हुआ। - आप जहाँ भी हों , भक्ति स्वरूप परम पूज्य का स्मरण कर, सत्य-्समर्पण के भाव से " हे आदिशक्ति माँ " कहें वर्तमान में ही, हमारे पूज्य ग्रंथों में वर्णित आपको इसी महानतम भक्ति॰फल की अनुभूति होने लगेगी। आज शरीर की दृष्टि से शक्ति स्वरूप एवं भक्ति स्वरूप  ల दोनों ही हमारे बीच प्रत्यक्ष नहीं हैं; परन्तु वे स्तुत्य के परम ्पूज्य वह पावन निवास का कणन्कण उनके भक्ति से ज्वाजल्यमान और दिव्य स्पंदनों से चेतन है। यदि कभी तो सुन्दर " आप वहाँ पहुँच सकें, भक्ति-भाव से अवश्य जाएँ निश्चय ही अंतःकरण से धन्य होकर लौटेंगे। "जहाँ साधन नहीं, साध्यता स्वयं प्रकट है" "जहाँ विधि नहीं, केवल समर्पण ही मार्ग है" हे आदिशक्ति माँ सुन्दर नमन हे भक्ति स्वरूप युग की दृष्टि से हमारे वर्तमान काल में, मानव सृष्टि की अत्यंत गौरवशाली पृष्ठभूमि में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश है कि॰ परम ब्रह्म के परम प्रकाश, निराकार आदिशक्ति माँ का परम प्राकट्य - 771977 7, छत्तीसगढ़ के पत्थलगांव में , श्री सुधाकर जी में शक्ति स्वरूप के रूप में , एवं छत्तीसगढ़ के किरारी ड में, श्री बासुदेव जी में भक्ति स्वरूप के रूप में हुआ है। शक्ति स्वरूप श्री सुधाकर जी में परमात्मा के प्राकट्य से उनका परम तेज एवं महिमा इतनी प्रखर थी कि॰ की सुन्दर जन-सामान्य भी इस महान भक्ति शरण को प्राप्त कर धन्य हो सकें - इसी उद्देश्य से उन्हीं माँ का परम प्राकट्य किरारी ड के श्री बासुदेव जी में भक्ति स्वरूप के रूप में हुआ। - आप जहाँ भी हों , भक्ति स्वरूप परम पूज्य का स्मरण कर, सत्य-्समर्पण के भाव से " हे आदिशक्ति माँ " कहें वर्तमान में ही, हमारे पूज्य ग्रंथों में वर्णित आपको इसी महानतम भक्ति॰फल की अनुभूति होने लगेगी। आज शरीर की दृष्टि से शक्ति स्वरूप एवं भक्ति स्वरूप  ల दोनों ही हमारे बीच प्रत्यक्ष नहीं हैं; परन्तु वे स्तुत्य के परम ्पूज्य वह पावन निवास का कणन्कण उनके भक्ति से ज्वाजल्यमान और दिव्य स्पंदनों से चेतन है। यदि कभी तो सुन्दर " आप वहाँ पहुँच सकें, भक्ति-भाव से अवश्य जाएँ निश्चय ही अंतःकरण से धन्य होकर लौटेंगे। "जहाँ साधन नहीं, साध्यता स्वयं प्रकट है" "जहाँ विधि नहीं, केवल समर्पण ही मार्ग है" - ShareChat