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#✍🏽 माझ्या लेखणीतून #📝कविता / शायरी/ चारोळी #🥰प्रेम कविता📝 #📝हृदयस्पर्शी मराठी कविता✍🏻 #✍🏻प्रसिद्ध कवींच्या कविता📝
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - खामोशी विषय- खामोशी काव्यलेखिका- प्राःशितल कंबानी कहीं दिन सें दिल खामोश  १८ जनवरी २०२६ उदास चलाजा रहाथाः काम नाआ रहा था समयका मरहम రౌలౌౌ दिल अंदरही अंदर ठिठोली कर रहा था बाहा का समय नजदिक़ आ रहा थाः का तजुर्बा नया आनेवाला था  संसार हजार सवाल दिल में चल रहे थे.. ०० ४२ कैसा होंगा पिया  साजन कीदिल मेंजो छवी बसाई वैसा ही होंगा ना. [ सहेलियां ठिठोली करती के घर तुम्हे जाना हें॰ साजन कैसे बताएं दिल का दर्द पिया बीनजीना लगे और रास सें भिनी खुशबू  भिनी आती॰ वैसे दिल बैठा जाएं सोच के করূমা होंगा  HIUIF खामोशी छाई थी उन्ह के चेहरे पे फिर भी दिल खामोशी सें सें प्यार कर बैठा..२२४३  साजन अबतो तोरे अंगना जब आऊंगी तभी आपकी खामोशी को मैं बदल दुंगी हंसी में ॰  आंगन खुशीओं सें महकाऊंगी  तेराघर सें महकाऊंगी खुशीओं  घर आगन 4६वादा रहा साणन अपने अंदर के खामोश दिल सें किया.०४  आपके खामोश चेहरेकी हंसी महकेंगी और अपना घरसंसार खिलेंगा यहवादा रहाः३३ खामोशी विषय- खामोशी काव्यलेखिका- प्राःशितल कंबानी कहीं दिन सें दिल खामोश  १८ जनवरी २०२६ उदास चलाजा रहाथाः काम नाआ रहा था समयका मरहम రౌలౌౌ दिल अंदरही अंदर ठिठोली कर रहा था बाहा का समय नजदिक़ आ रहा थाः का तजुर्बा नया आनेवाला था  संसार हजार सवाल दिल में चल रहे थे.. ०० ४२ कैसा होंगा पिया  साजन कीदिल मेंजो छवी बसाई वैसा ही होंगा ना. [ सहेलियां ठिठोली करती के घर तुम्हे जाना हें॰ साजन कैसे बताएं दिल का दर्द पिया बीनजीना लगे और रास सें भिनी खुशबू  भिनी आती॰ वैसे दिल बैठा जाएं सोच के করূমা होंगा  HIUIF खामोशी छाई थी उन्ह के चेहरे पे फिर भी दिल खामोशी सें सें प्यार कर बैठा..२२४३  साजन अबतो तोरे अंगना जब आऊंगी तभी आपकी खामोशी को मैं बदल दुंगी हंसी में ॰  आंगन खुशीओं सें महकाऊंगी  तेराघर सें महकाऊंगी खुशीओं  घर आगन 4६वादा रहा साणन अपने अंदर के खामोश दिल सें किया.०४  आपके खामोश चेहरेकी हंसी महकेंगी और अपना घरसंसार खिलेंगा यहवादा रहाः३३ - ShareChat