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🌾 किसान की मेहनत का मान 🌾 मजाक बनाकर हँसते रहे, जो दर्द न पहचान सके, तानाशाही की दीवारों में कुछ दिल इंसान न बन सके। पर आँखों की आशु में हर पल, वह ज़ख़्म साफ़ दिखा, जो किसान पर बीते थे, पर किसी ने सच न लिखा। धूप तपती रही सिर पर, फिर भी कदम न रुके, बारिश की कठोर बौछारों में भी उसके हौसले न झुके। सर्द हवाएँ चुभती रहीं, पर उसका हौंसला अटल रहा, तूफ़ानों की गर्जन में भी वह खेतों में पल-पल पिघल रहा। दिन हो या लम्बी रातें, वह हाथों से धरती को सहलाता रहा, अन्न की सुनहरी बोरियाँ भरकर, सभ्यताओं को चलाता रहा। देश हो या प्रदेश, हर थाली में उसकी मेहनत का मान है, उसकी तपस्या ही जीवन का आधार है—उसका ही सम्मान है। ना शिकायत, ना अभिमान—बस कर्तव्य निभाता रहा, माटी को सींचने वाला यह योद्धा विश्व को अन्न का दान देता रहा। ✍️— दीपक कौशिक कल्याण #kisan #sakti
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