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#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - प्रकृति का दिया सबकुछ जैसा था जीवों के लिए पर्याप्त था ! सब एक जीव की जिज्ञासा बढी ! उसने स्वयं को मनुष्य नाम दिया व प्रकृति के को जानना चाहा और धर्म रहस्यों का उदय हुआ ! लेकिन जब उसका मन बढ़ा तो उसने अन्य जीवों के अधिकारों पर अतिक्रमण करना आरंभ कर दिया ! परिणाम स्वरूप अनगिनत जीव विलुप्त हो गए ! फिर उसने मनुष्यों के अधिकारों पर अतिक्रमण करना आरंभ कर दिया और अब वह स्वयं विलुप्त होने की कगार पर है! प्रकृति का दिया सबकुछ जैसा था जीवों के लिए पर्याप्त था ! सब एक जीव की जिज्ञासा बढी ! उसने स्वयं को मनुष्य नाम दिया व प्रकृति के को जानना चाहा और धर्म रहस्यों का उदय हुआ ! लेकिन जब उसका मन बढ़ा तो उसने अन्य जीवों के अधिकारों पर अतिक्रमण करना आरंभ कर दिया ! परिणाम स्वरूप अनगिनत जीव विलुप्त हो गए ! फिर उसने मनुष्यों के अधिकारों पर अतिक्रमण करना आरंभ कर दिया और अब वह स्वयं विलुप्त होने की कगार पर है! - ShareChat