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#❤️अस्सलामु अलैकुम #🤲क़ुरान शरीफ़📗 #🤲अल्लाह हु अक़बर #🕋जुम्मा मुबारक🤲 #🕋इस्लामिक दुआ 🤲
❤️अस्सलामु अलैकुम - कामयाब रिश्ता बड़ी बातों से नहीं , बड़ी नीयतों से बनता है इस्लाम हमें सिखाता है कि रिश्ते अल्फ़ाज़ के वादों से नहीं , किरदार की सच्चाई से चलते हैं। न नाटकीय कसमों की जरूरत, न हर बात पर शर्तों की दीवार। बस दो ऐसे दिल चाहिए - एक निभाने वाला...दूसरा समझने वाला। जब एक गलती करे तो दूसरा पर्दा डाल दे, जब एक थक जाए तो दूसरा सहारा बन जाए, जाए तो दूसरा उसके दिल की आवाज़ चुप हो সুন ল जब एक यही सुन्नत वाला रिश्ता है, यही रहमत वाला रिश्ता है। नबी करीम # का तरीका यही था नर्मी, सब्र, दरगुज़र और एहसास। जहाँ " मैं सही ' से ज्यादा ` रिश्ता सही  ज़रूरी हो, वहीं मोहब्बत इबादत बन जाती है। रखिए flta _ Write याद अल्लाह उन रिश्तों में बरकत देता है जहाँ अहंकार नहीं, बल्कि समझदारी होती है। रिश्ता निभाना हुनर नहीं . अख़लाक , सब्र और नीयत की पाकीज़गी है। और जिस रिश्ते में अल्लाह की रज़ा शामिल हो जाए, उसे कोई तूफ़ान नहीं तोड़ सकता। कामयाब रिश्ता बड़ी बातों से नहीं , बड़ी नीयतों से बनता है इस्लाम हमें सिखाता है कि रिश्ते अल्फ़ाज़ के वादों से नहीं , किरदार की सच्चाई से चलते हैं। न नाटकीय कसमों की जरूरत, न हर बात पर शर्तों की दीवार। बस दो ऐसे दिल चाहिए - एक निभाने वाला...दूसरा समझने वाला। जब एक गलती करे तो दूसरा पर्दा डाल दे, जब एक थक जाए तो दूसरा सहारा बन जाए, जाए तो दूसरा उसके दिल की आवाज़ चुप हो সুন ল जब एक यही सुन्नत वाला रिश्ता है, यही रहमत वाला रिश्ता है। नबी करीम # का तरीका यही था नर्मी, सब्र, दरगुज़र और एहसास। जहाँ " मैं सही ' से ज्यादा ` रिश्ता सही  ज़रूरी हो, वहीं मोहब्बत इबादत बन जाती है। रखिए flta _ Write याद अल्लाह उन रिश्तों में बरकत देता है जहाँ अहंकार नहीं, बल्कि समझदारी होती है। रिश्ता निभाना हुनर नहीं . अख़लाक , सब्र और नीयत की पाकीज़गी है। और जिस रिश्ते में अल्लाह की रज़ा शामिल हो जाए, उसे कोई तूफ़ान नहीं तोड़ सकता। - ShareChat