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#✍️ साहित्य एवं शायरी #💌 प्रेम पत्र #💌 प्रेम पत्र #💞Heart touching शायरी✍️ #📖 कविता और कोट्स✒️ #दिल कि बातें ... दिल कि कलम से
✍️ साहित्य एवं शायरी - "धूल भरी कितारबों में जब देखूं सूखे सुर्ख गुलाबों को रोता बिलखता पाती हूं उन सपनों को उन ख्वाबों कौ! बनकर कांटा उस गुल का तुम इस दिल में फिर चुभ जाते हो, बरसों बीते जुदा हुए फिर क्यों इतना याद आते हो? रुकी रुकी सी सांसे जब और स्थिर स्नेह की नदियां हो, बेचैनी का हो आलम एकांत के तम की दुनिया हो! बनकर जुगनू तुम रातों का अंतर्मन को चमकाते हो, बरसों बीते जुदा हुए फिर क्यों इतना याद आते हो? देख अंधेरा डर जाती जब सुनसान सी काली रातों का, ठंडी ठंडी हवा चले और हो मौसम बरसातों का! 434 कोरी कोरी आंखों 3{ बह जाते हो, बनकर बरसों बीते जुदा हुए, फिर क्यों इतना याद आते हो? "धूल भरी कितारबों में जब देखूं सूखे सुर्ख गुलाबों को रोता बिलखता पाती हूं उन सपनों को उन ख्वाबों कौ! बनकर कांटा उस गुल का तुम इस दिल में फिर चुभ जाते हो, बरसों बीते जुदा हुए फिर क्यों इतना याद आते हो? रुकी रुकी सी सांसे जब और स्थिर स्नेह की नदियां हो, बेचैनी का हो आलम एकांत के तम की दुनिया हो! बनकर जुगनू तुम रातों का अंतर्मन को चमकाते हो, बरसों बीते जुदा हुए फिर क्यों इतना याद आते हो? देख अंधेरा डर जाती जब सुनसान सी काली रातों का, ठंडी ठंडी हवा चले और हो मौसम बरसातों का! 434 कोरी कोरी आंखों 3{ बह जाते हो, बनकर बरसों बीते जुदा हुए, फिर क्यों इतना याद आते हो? - ShareChat