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#📖Whatsapp शायरी #🎙️मशहूर शायरों की शायरी✍️ #🖋ग़ालिब की शायरी
📖Whatsapp शायरी - न कोई अहले जिगर जो खरीद पाए मिज़ाज मेरा मोहब्बत और नफरत दोनों में बेमिसाल .88 हु मैं॰ न कोई अहले जिगर जो खरीद पाए मिज़ाज मेरा मोहब्बत और नफरत दोनों में बेमिसाल .88 हु मैं॰ - ShareChat