ShareChat
click to see wallet page
search
#मन की बात
मन की बात - मजबूत दिखते दिखते मैं थक गई हूँ। लगता है मैं संभली ٤ چا सबको पर अंदर से बिखरी पड़ी खी्ही ईहै मेरी हँसी सजी 8 मेरी आँखें 81 रूह पर लगे ज़ख्म किसी को दिखाई नहीं देते। मैं अपनी ही जिंदगी के सबसे कठिन मोड़ पर खड़ी & और सबसे गहरा दर्द ये है कि मैं किसी को बता भी नहीं सकती कि मेरे अंदर क्या टूट रहा है। हर रोज़ "मैं ठीक हूँ " कहकर मैं अपनी ही खामोशी को ಖತ] ' और भारी कर देती हूँ। मजबूत दिखते दिखते मैं थक गई हूँ। लगता है मैं संभली ٤ چا सबको पर अंदर से बिखरी पड़ी खी्ही ईहै मेरी हँसी सजी 8 मेरी आँखें 81 रूह पर लगे ज़ख्म किसी को दिखाई नहीं देते। मैं अपनी ही जिंदगी के सबसे कठिन मोड़ पर खड़ी & और सबसे गहरा दर्द ये है कि मैं किसी को बता भी नहीं सकती कि मेरे अंदर क्या टूट रहा है। हर रोज़ "मैं ठीक हूँ " कहकर मैं अपनी ही खामोशी को ಖತ] ' और भारी कर देती हूँ। - ShareChat