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!जीवन को महकाया तूने! जीवन को मेरे तूने महकाया है ऐसे, खुशबू से गुलिस्तां महकता हो जैसे। हर जन्म रहे साथ बस तेरा, सागर में पानी रहता हो जैसे। बांहों में भर कर आगोश में ले लो, सीप में मोती रमता हो जैसे। छुपा लो दिन के किसी कोने में, आँखों में कोई ख्वाब बसता हो जैसे। तेरी जुदाई का असर ये हो चला अब, पर कटा पंछी तड़पता हो जैसे। कवि ‘राज़’ भी है नादान कितना, दूर होकर भी कोई यूँ मिटाना है ऐसे ? लेखक:-मनोज चौहान, 🌹✍️... #🌷..chauhan..💐🌺
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