🌸🌸..“अमोघं दिवसं कयिरा,
अप्पेन बहुकेन वा।
यं यं विजहते रत्तिं,
तदूनं तस्स जीवितं॥
"अल्प (थोड़ी) या बहुत (साधना) द्वारा दिन को बेकार न जाने दें। जो जो रात बीतती जाती है, उससे जीवन भी कम होता जाता है।"..🌸🌸
🌼🌼..“चरतो तिट्ठतो वापि,
आसीनसयनस्स वा।
उपेति चरिमा रत्ति,
न ते कालो पमज्जितु”न्ति॥
"चलते, ठहरते या लेटते (किसी भी समय) आखरी रात आ जाती है, तुम्हें प्रमाद करने का समय नहीं है।"..🌼🌼
🌺..सिरिमण्डत्थेरगाथा,
खुद्दकनिकाय,
सुत्तपिटक..🌺
#☸️साधु साधु साधु ☸️ #🙏🪷☸️साधु साधु साधु ☸️🪷🙏 #साधु साधु साधु 🙏🪷☸️🪷🙏 #💪बुद्धांची तत्वे📜 #बुद्धगया


