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#✍🏽 माझ्या लेखणीतून #🎤कविता माझ्या आवाजात #🥰प्रेम कविता📝 #💭माझे विचार #📝कविता / शायरी/ चारोळी
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - ।।मृगतृष्णा।| मृगतृष्णा सा साथ है तेरा, दूर से अपना लगता है। आओ तो ट्ूटे शीशे सा, पास महज एकसपना लगता है। रेत पर चमकती उस धूप जैसा, जो प्यास को बस बहलाती है। जितनी शिद्दत से बढ़ूँ तेरी ओर, मंज़िल उतनी ही दूर हो जाती है। धुंधली सी एकतस्वीर है तू जो रूह मेंतो साफ़ बसती है। मगर हकीकत की तल्ख ؟٦٩ परछाई बनके हाथ से फिसलती है। अजीब कशमकश हे इस मोहब्बत की॰ तुझे खोना भी नहीं , तुझे पाना भी नहीं करीब आएतो भरम टूट जाएगा, और दूर रहकर अब जी पाना भी नहीं Cnuaspon Your uote.in ।।मृगतृष्णा।| मृगतृष्णा सा साथ है तेरा, दूर से अपना लगता है। आओ तो ट्ूटे शीशे सा, पास महज एकसपना लगता है। रेत पर चमकती उस धूप जैसा, जो प्यास को बस बहलाती है। जितनी शिद्दत से बढ़ूँ तेरी ओर, मंज़िल उतनी ही दूर हो जाती है। धुंधली सी एकतस्वीर है तू जो रूह मेंतो साफ़ बसती है। मगर हकीकत की तल्ख ؟٦٩ परछाई बनके हाथ से फिसलती है। अजीब कशमकश हे इस मोहब्बत की॰ तुझे खोना भी नहीं , तुझे पाना भी नहीं करीब आएतो भरम टूट जाएगा, और दूर रहकर अब जी पाना भी नहीं Cnuaspon Your uote.in - ShareChat