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आत्मज्ञान ही मोक्ष का मार्ग है #आत्मज्ञान🧘 #आत्मज्ञान #🕉🕉आत्मज्ञान🚩🕉🕉🕉
मनुष्य बनने से पहले आत्मा क्या-्क्या बनती है? वृक्ष योनि मनुष्य जन्म पाने से पहले आत्मा को लगभग २० लाख बार वृक्ष योनि में जन्म लेना पड़ता है। जलचर जीव - इसके बाद आत्मा करीब ९९ लाख बार जलचर जीवों के रूप में जन्म लेती है। कीट-्पतंग - फिर वह १० लाख बार कीट-्पतंगों ক্রী য্রীনি ম 3ননাং ললী ট1 पक्षी योनि उसके बाद ११ लाख बार पक्षियों की योनि में जन्म होता है। पशु योनि - इसके बाद आत्मा २० लाख बार पशु योनि में जीवन बिताती है। गऊ माता की योनि - इन सभी योनियों के बाद कर्म के अनुसार आत्मा को गऊ माता की पवित्र योनि प्राप्त होती है। वहीं से मनुष्य जन्म का अधिकार मिलता है। मनुष्य योनि - मनुष्य योनि में भी आत्मा को लगभग लेना पड़ता है। चार लाख बार जन्म পিনূ যা ঐন য্রীনি अंत में आत्मा पितृ या देव योनि की यात्रा करती है। आपको ये पता था? क्या आत्मा की अनंत यात्राः मोक्ष की ओर कदम। आत्मज्ञान ही मोक्ष का मार्ग है। 35 मनुष्य बनने से पहले आत्मा क्या-्क्या बनती है? वृक्ष योनि मनुष्य जन्म पाने से पहले आत्मा को लगभग २० लाख बार वृक्ष योनि में जन्म लेना पड़ता है। जलचर जीव - इसके बाद आत्मा करीब ९९ लाख बार जलचर जीवों के रूप में जन्म लेती है। कीट-्पतंग - फिर वह १० लाख बार कीट-्पतंगों ক্রী য্রীনি ম 3ননাং ললী ট1 पक्षी योनि उसके बाद ११ लाख बार पक्षियों की योनि में जन्म होता है। पशु योनि - इसके बाद आत्मा २० लाख बार पशु योनि में जीवन बिताती है। गऊ माता की योनि - इन सभी योनियों के बाद कर्म के अनुसार आत्मा को गऊ माता की पवित्र योनि प्राप्त होती है। वहीं से मनुष्य जन्म का अधिकार मिलता है। मनुष्य योनि - मनुष्य योनि में भी आत्मा को लगभग लेना पड़ता है। चार लाख बार जन्म পিনূ যা ঐন য্রীনি अंत में आत्मा पितृ या देव योनि की यात्रा करती है। आपको ये पता था? क्या आत्मा की अनंत यात्राः मोक्ष की ओर कदम। आत्मज्ञान ही मोक्ष का मार्ग है। 35
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    Lavkush Awasthi
    #सत्य वचन #सत्य वचन #आत्मज्ञान🧘 #जय श्री कृष्ण
    सत्य वचन, सत्य वचन
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    आत्मज्ञान #आत्मज्ञान🧘 #आत्मज्ञान #🕉🕉आत्मज्ञान🚩🕉🕉🕉
    मनुष्य बनने से पहले आत्मा क्या-्क्या बनती है? वृक्ष योनि मनुष्य जन्म पाने से पहले आत्मा को लगभग २० लाख बार वृक्ष योनि में जन्म लेना पड़ता है। जलचर जीव इसके बाद आत्मा करीब ९९ लाख बार जलचर जीवों के रूप में जन्म लेती है। ক্ীম-এনয য্ীনি फिर वह १० लाख बार कीट- पतंगों की योनि में अवतार लेती है। पक्षी योनि पक्षियों की योनि में जन्म होता है। उसके बाद ११ लाख बार पशु योनि इसके बाद आत्मा २० लाख बार पशु योनि में जीवन बिताती है। गऊ माता योनि इन सभी योनियों के बाद कर्म के अनुसार आत्मा को गऊ माता की पवित्र योनि प्राप्त होती है। वहीं से मनुष्य जन्म का अधिकार मिलता है। मनुष्य योनि मनुष्य योनि में भी आत्मा को लगभग चार लाख बार जन्म लेना पड़ता है। পিনূ যা ঐন্র যীনি গন ম সান্সা পিনূ যা ঐন যরীনি কী যান্সা কবনী ট1 यह आत्मा की अनंत यात्रा और कर्म का चक्र है। क्या आपको ये पता था? ऐसे ही पोस्ट पढ़ने के लिए पेज को फॉलो करे मनुष्य बनने से पहले आत्मा क्या-्क्या बनती है? वृक्ष योनि मनुष्य जन्म पाने से पहले आत्मा को लगभग २० लाख बार वृक्ष योनि में जन्म लेना पड़ता है। जलचर जीव इसके बाद आत्मा करीब ९९ लाख बार जलचर जीवों के रूप में जन्म लेती है। ক্ীম-এনয য্ীনি फिर वह १० लाख बार कीट- पतंगों की योनि में अवतार लेती है। पक्षी योनि पक्षियों की योनि में जन्म होता है। उसके बाद ११ लाख बार पशु योनि इसके बाद आत्मा २० लाख बार पशु योनि में जीवन बिताती है। गऊ माता योनि इन सभी योनियों के बाद कर्म के अनुसार आत्मा को गऊ माता की पवित्र योनि प्राप्त होती है। वहीं से मनुष्य जन्म का अधिकार मिलता है। मनुष्य योनि मनुष्य योनि में भी आत्मा को लगभग चार लाख बार जन्म लेना पड़ता है। পিনূ যা ঐন্র যীনি গন ম সান্সা পিনূ যা ঐন যরীনি কী যান্সা কবনী ট1 यह आत्मा की अनंत यात्रा और कर्म का चक्र है। क्या आपको ये पता था? ऐसे ही पोस्ट पढ़ने के लिए पेज को फॉलो करे
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