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#☝अनमोल ज्ञान #✍ आदर्श कोट्स #🙏सुविचार📿
☝अनमोल ज्ञान - मंदिर जाना आसान है, पर अच्छे कर्म करना कठिन। घंटी बजाना , माथा टेकना और दुआ माँगना हर कोई कर लेता है, लेकिन इंसानियत निभाना ही असली परीक्षा है। कर्म ही झूठ, स्वार्थ और अहंकार से भरे हों तो हमारे अगर फिर पूजा का क्या अर्थ रह जाता है? याद रखो, रावण शिव का महान भक्त था, सिर अर्पित कर देता था, लेकिन उसके अधर्म ने ही उसका अंत लिखा। सच्चे कर्म ईश्वर को मंदिर की सीढ़ियाँ नहीं, बल्कि हमारे  प्यारे लगते हैं। का भला करना और इंसानियत से बोलना, दूसरों ; सच जीना ही सबसे बड़ा धर्म और सबसे बड़ी पूजा है।७७० मंदिर जाना आसान है, पर अच्छे कर्म करना कठिन। घंटी बजाना , माथा टेकना और दुआ माँगना हर कोई कर लेता है, लेकिन इंसानियत निभाना ही असली परीक्षा है। कर्म ही झूठ, स्वार्थ और अहंकार से भरे हों तो हमारे अगर फिर पूजा का क्या अर्थ रह जाता है? याद रखो, रावण शिव का महान भक्त था, सिर अर्पित कर देता था, लेकिन उसके अधर्म ने ही उसका अंत लिखा। सच्चे कर्म ईश्वर को मंदिर की सीढ़ियाँ नहीं, बल्कि हमारे  प्यारे लगते हैं। का भला करना और इंसानियत से बोलना, दूसरों ; सच जीना ही सबसे बड़ा धर्म और सबसे बड़ी पूजा है।७७० - ShareChat