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#shri krishna #🙏🦚जय श्री कृष्णा🙏🦚 #श्री कृष्ण के कथन #जय श्री कृष्णा
shri krishna - घोने के नीघे छूपना पग़ा! जग तीनों लोकों केस्यामीकोएक  अद्भृत कया जो आपकी आँखों में आँसूला देगी] [ ٦٠ ٠٦ कीरै जग ग्रजमें नटसट गोपाल की खाल लीलाएं घरम पर रयीं। कान्दाकी e[ tetellErFrire शरारतों से पूरा गोफ्नुल गूंजता था। कमी किसी की मटकी फोग़ना , तो कमी माख्न घूराना! गोपियोंके उलाउनों से तंग आकर, एक दिन मैया यशोदा का धैर्य जघाख देगया। कोघ में आकर मैया ने छघी उठाई और कान्ा के पीछे दोर पग़ी। आज नठीं छोगूंगी तृसे , बठ्ठत नटखट हो गया ऐ तू॰ मैया का रौद्र र्म देखकर घल कृष्ण अपने नन्े नन्े कदर्मों से सरपट मागे। मागते मागते वे एक करुम्हार (प्रजापति ) के घर में जञा घूसे। Sunita Bairagi उससमय कृम्हार मिट्ठी के बर्तन घनाने में मग्न या। अघानक उसने देखा कि साक्षात घ्रिमुघन के स्यामी मयमीत ऐोकर उसके सामने खरेरऐैl सांसें फूल रही थीं, और कान्हा घोले ~ * क्ुम्सर काका! क्रुम्स्र काका! मेरी मैया छघ़ी लेकर आ रढ़ीऐै॰ मृसे काढ़ीं छिपा लो॰ प्लीजा कुम्हर तो प्रमू को परघान गया था। बढ मन ठी मन गदगदठो गा्या कि आज स्वयं ' उसकी I[:IF शरण में आएढ़। उसने आव देखा न ताव , तूरंत कान्हा को एक व़् से मिट्ठी के घठ्े के नीघे छिपा दिया। कृछरी क्षर्णों में मैया यशोदा घढां आ पठ्ूंखी[ घोने के नीघे छूपना पग़ा! जग तीनों लोकों केस्यामीकोएक  अद्भृत कया जो आपकी आँखों में आँसूला देगी] [ ٦٠ ٠٦ कीरै जग ग्रजमें नटसट गोपाल की खाल लीलाएं घरम पर रयीं। कान्दाकी e[ tetellErFrire शरारतों से पूरा गोफ्नुल गूंजता था। कमी किसी की मटकी फोग़ना , तो कमी माख्न घूराना! गोपियोंके उलाउनों से तंग आकर, एक दिन मैया यशोदा का धैर्य जघाख देगया। कोघ में आकर मैया ने छघी उठाई और कान्ा के पीछे दोर पग़ी। आज नठीं छोगूंगी तृसे , बठ्ठत नटखट हो गया ऐ तू॰ मैया का रौद्र र्म देखकर घल कृष्ण अपने नन्े नन्े कदर्मों से सरपट मागे। मागते मागते वे एक करुम्हार (प्रजापति ) के घर में जञा घूसे। Sunita Bairagi उससमय कृम्हार मिट्ठी के बर्तन घनाने में मग्न या। अघानक उसने देखा कि साक्षात घ्रिमुघन के स्यामी मयमीत ऐोकर उसके सामने खरेरऐैl सांसें फूल रही थीं, और कान्हा घोले ~ * क्ुम्सर काका! क्रुम्स्र काका! मेरी मैया छघ़ी लेकर आ रढ़ीऐै॰ मृसे काढ़ीं छिपा लो॰ प्लीजा कुम्हर तो प्रमू को परघान गया था। बढ मन ठी मन गदगदठो गा्या कि आज स्वयं ' उसकी I[:IF शरण में आएढ़। उसने आव देखा न ताव , तूरंत कान्हा को एक व़् से मिट्ठी के घठ्े के नीघे छिपा दिया। कृछरी क्षर्णों में मैया यशोदा घढां आ पठ्ूंखी[ - ShareChat