🙏 जय श्री राम🙏
👉 हनुमान–सुग्रीव भेंट एवं राम–सुग्रीव मित्रता प्रसंग 🐒🤝🏹
🌄 वाल्मीकि रामायण | अगला दिन🌄
🕉️श्लोक 1 (हनुमान से प्रथम भेंट):
स तु रामं महात्मानं
दृष्ट्वा वाक्यमुवाच ह।
कच्चित् कुशलिनौ वीरौ
भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ॥
✨ अर्थ:
महात्मा श्रीराम को देखकर
हनुमान जी ने विनम्रता से पूछा—
हे वीरों!
क्या आप दोनों भ्राता
सुख और कुशल से हैं? 🙏🐒
🌿 जहाँ वाणी में विनय हो,
वहीं से मित्रता जन्म लेती है…🌿
🌸श्लोक 2 (राम–सुग्रीव मित्रता):
एवमुक्त्वा तु सुग्रीवो
रामेण सह मन्त्रयत्।
अग्निं साक्षिणमासाद्य
मैत्रीं तेषां प्रजायते॥
✨ अर्थ:
हनुमान के माध्यम से
सुग्रीव और श्रीराम का संवाद हुआ।
अग्नि को साक्षी मानकर
उन दोनों के बीच
पवित्र मित्रता स्थापित हुई। 🔥🤝
🌺 धर्म की मित्रता
काल को भी बदल देती है…🌺
🙏जय श्री राम🙏
🌼 जहाँ राम हैं,
वहीं हनुमान हैं🌼
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