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#मेरी डायरी
मेरी डायरी - 4ন7[6 किसी की जिंदगी छोटी , तो किसी की बड़ी होती है! मौत किसी के दरवाज़े पर, तो किसी के सिर पर खड़ी होती है, कौन जाने किसी के हिस्से में , कल का सूरज आएगा कि नहीं! जिससे मुंह फुलाकर बैठे हो आज, वो क्या पता कल मिल पाएगा की नहीं! दिल से जुड़े रिश्तों को, यूँ ना ग़लतफ़हमियों का शिकार बनाइए! मन-्मुटाव की इस गाँठ को इतना कस कर ना लगाइए! ये वक्त की रेत हाथों से, এল ম ক্রিমল আহ্শী,, 4ন7[6 किसी की जिंदगी छोटी , तो किसी की बड़ी होती है! मौत किसी के दरवाज़े पर, तो किसी के सिर पर खड़ी होती है, कौन जाने किसी के हिस्से में , कल का सूरज आएगा कि नहीं! जिससे मुंह फुलाकर बैठे हो आज, वो क्या पता कल मिल पाएगा की नहीं! दिल से जुड़े रिश्तों को, यूँ ना ग़लतफ़हमियों का शिकार बनाइए! मन-्मुटाव की इस गाँठ को इतना कस कर ना लगाइए! ये वक्त की रेत हाथों से, এল ম ক্রিমল আহ্শী,, - ShareChat