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#satya vachan
satya vachan - मंदोदरी अपने पुत्र मेघनाथ से बोली, "पुत्र अगर उन्हें पहचान ही लिया है कि वे स्वयं भगवान तुमने मैु।क्ति  तुम अकेले ही उनकी शरण में चले जाओ। के पथ पर प्राणी अकेला ही जाता है। बेटा तुम धर्म का मार्ग अपनाओ। " विमुख जो पुत्र अपने पिता से मेघनाद ने कहा I छोड़कर होकर पिता को शत्रुओं में अकेला সক্ক होने जाता है। उसका देवता तो क्या भगवान आदर नहीं करेंगे। धर्म का मार्ग बता रही हो माता। तो पुत्र  के लिए केवल एक ही धर्म का मार्ग है | अपने पिता के चरणों में अपनी सुख, संपत्ति, वैभव यहां तक कि अपनी मुक्ति का भी बलिदान दे देना। स्वयं राम ने भी यही आदर्श सिखाया है। आज की पीढ़ी को ये बात समझ में नहीं आएगी??" मंदोदरी अपने पुत्र मेघनाथ से बोली, "पुत्र अगर उन्हें पहचान ही लिया है कि वे स्वयं भगवान तुमने मैु।क्ति  तुम अकेले ही उनकी शरण में चले जाओ। के पथ पर प्राणी अकेला ही जाता है। बेटा तुम धर्म का मार्ग अपनाओ। " विमुख जो पुत्र अपने पिता से मेघनाद ने कहा I छोड़कर होकर पिता को शत्रुओं में अकेला সক্ক होने जाता है। उसका देवता तो क्या भगवान आदर नहीं करेंगे। धर्म का मार्ग बता रही हो माता। तो पुत्र  के लिए केवल एक ही धर्म का मार्ग है | अपने पिता के चरणों में अपनी सुख, संपत्ति, वैभव यहां तक कि अपनी मुक्ति का भी बलिदान दे देना। स्वयं राम ने भी यही आदर्श सिखाया है। आज की पीढ़ी को ये बात समझ में नहीं आएगी??" - ShareChat