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##नैतिक शिक्षा..कहानिया
#नैतिक शिक्षा..कहानिया - कौआ मूर्ख पढाड़़ को चोटी पर एक बान पश्षा रहता था। वही पेड परएक कोआ रहता था। वह बहुत चालाक था। करना कुछ न पडे़ ताक में रहतो। पेड को जड़ में खरगोश रहते थ। खरगोश 541 खाना मिल जाए आता, तो चाज झपटा मारकर उसे उठा ल जाता। केआ नें सोचा , dist मंःथी झपटटा मारकर खरगेश को पकड़ लूगा। खरगोश बाहर आया। कौआ ने उस पर झपटा मारा। भला कौआ और बाल की वऱया बरावरी। खरगोश ने कोऐ को देख लिया। भागकर छिप गया। कोआ अपनी झोंक में चट्टान सेजा टकराया। उसको चोच और गरट्न टूट गये। वही दम तोड दिया। नकल करना ठीक नहीं है॰ अकल से काम करना चाहिए।  नकल करना ठीक नहीं है। चाहिए। अकल से काम करना कौआ मूर्ख पढाड़़ को चोटी पर एक बान पश्षा रहता था। वही पेड परएक कोआ रहता था। वह बहुत चालाक था। करना कुछ न पडे़ ताक में रहतो। पेड को जड़ में खरगोश रहते थ। खरगोश 541 खाना मिल जाए आता, तो चाज झपटा मारकर उसे उठा ल जाता। केआ नें सोचा , dist मंःथी झपटटा मारकर खरगेश को पकड़ लूगा। खरगोश बाहर आया। कौआ ने उस पर झपटा मारा। भला कौआ और बाल की वऱया बरावरी। खरगोश ने कोऐ को देख लिया। भागकर छिप गया। कोआ अपनी झोंक में चट्टान सेजा टकराया। उसको चोच और गरट्न टूट गये। वही दम तोड दिया। नकल करना ठीक नहीं है॰ अकल से काम करना चाहिए।  नकल करना ठीक नहीं है। चाहिए। अकल से काम करना - ShareChat