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जवानी में की गयी बचत और
औलाद को दिये गये संस्कार,
बुढ़ापे का सहारा हैं।
शरीर जब साथ छोड़ने लगे
तब मन की शान्ति ही
सबसे बड़ी दौलत है।
अपनों को वक़्त दीजिये
क्योंकि अन्त में सिर्फ़ यादें
और अपने ही रह जाते हैं।
अपने जीवन की संध्या रुपी बुढ़ापे को
गौरवपूर्ण बनाना...
अपने स्वयं के कर्मों पर है!
🥸 सुप्रभात 🥸 #❤️जीवन की सीख

