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#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - खुद को एक छोटा सा कांटा भी चुभ जाए तो बहुत लेकिन निर्दोषों की जान लेने मे रत्ती दर्द होता है भर भी संकोच नहीं होता ! स्वाद के लिए जीव हत्या, अनावश्यक इच्छाओं के लिए जंगलों और पहाड़ों की लिए रिश्तों और मानवता की हत्या రెగ स्वार्थ हत्या, छल ्कपट और पाप की पराकाष्ठा की परिणिति होते हैं भुगतान सभी को करना पड़ता है ! गेंहू के साथ युद्ध घुन भी पिसता है ! खुद को एक छोटा सा कांटा भी चुभ जाए तो बहुत लेकिन निर्दोषों की जान लेने मे रत्ती दर्द होता है भर भी संकोच नहीं होता ! स्वाद के लिए जीव हत्या, अनावश्यक इच्छाओं के लिए जंगलों और पहाड़ों की लिए रिश्तों और मानवता की हत्या రెగ स्वार्थ हत्या, छल ्कपट और पाप की पराकाष्ठा की परिणिति होते हैं भुगतान सभी को करना पड़ता है ! गेंहू के साथ युद्ध घुन भी पिसता है ! - ShareChat