ShareChat
click to see wallet page
search
#नेति_नेति_क्यों_कहा_गया_हैं_? 🌼🌼🌼 हमारे पवित्र वेदों और गीता जी में भगवान की महिमा तो हैं परंतु उनके विषय संपूर्ण आध्यात्मिक नॉलेज (#तत्वज्ञान) नहीं हैं क्योंकि वेद और गीता जी का ज्ञान #ब्रम्ह (क्षरपुरूष) ने बताया हैं जो कि #पूर्णब्रम्ह / सत्यपुरूष (परम् अक्षरपुरूष) का पुत्र हैं और एक पुत्र अपने पिता के विषय में संपूर्ण नॉलेज कैसे रख सकता हैं ? इसलिए पवित्र गीता जी के अध्याय 4 के श्लोक नम्बर 32 में यह स्पष्ट कर दिया हैं कि.... एवम्, बहुविधाः, यज्ञाः, वितताः, ब्रह्मणः, मुखे, कर्मजान्, विद्धि, तान्, सर्वान्, एवम्, ज्ञात्वा, विमोक्ष्यसे।।32।। अनुवाद :- (एवम्) इस प्रकार और भी (बहुविधाः) बहुत तरह के शास्त्र अनुसार (यज्ञाः) धार्मिक क्रियाएं (यज्ञ ) हैं (तान्) उन (सर्वान्) सबको तू (कर्मजान्) कर्मों के द्वारा होने वाली (विद्धि) जान । (एवम्) इस प्रकार (#ब्रह्मणः) #पूर्ण_परमात्मा के (मुखे) मुख कमल से जो #तत्वज्ञान बोला गया हैं उनका विवरण #पाँचवे_वेद अर्थात् #स्वसमवेद में (वितताः) विस्तार से बताया गया हैं जिसे (ज्ञात्वा) जानकर तुम (विमोक्ष्यसे) पूर्ण मुक्त हो जायगा। 🌼🌼🌼 अतः स्पष्ट हैं जिस ज्ञान (#तत्वज्ञान) से परमात्मा (#पूर्णब्रम्ह/सत्यपुरूष) की प्राप्ति होगी वह ज्ञान इन चारों वेदों और गीता जी में सम्पूर्णतया नहीं हैं,उनका केवल संकेत किया गया हैं कि उसे #तत्वदर्शी_सन्त ही बतला पायेंगे,मैं गीता ज्ञानदाता प्रभू #ब्रम्ह नहीं । ✓✓✓ आतमज्ञान और परमातम् ज्ञान के विषय में पवित्र सतग्रंथों (वेद गीता पुराण कूर्रान बाइबल गुरूग्रन्थ साहेब) के प्रमाणों के सांथ यदि आप रूबरू होना चाहते हैं तो सपरिवार देखिए साधना टीवी चैनल सायं 07:30 pm. #तत्वज्ञान संदेश
तत्वज्ञान संदेश - श्रीमद्धगवद्गीता उस परमेश्वर की भक्ति करो जिससे पूर्ण मुक्ति हो। वह परमात्मा पूर्ण ब्रह्म सतपुरुष (सत कबीर ) है। इसी का प्रमाण गीता जी के अध्याय नं. १८ के श्लोक नं. ४६ में हैः- प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम्। d: स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः 3ঁ নিমম अनुवादः जिस परमेश्वर से सम्पूर्ण प्राणियों की उत्पत्ति  हुई है यह समस्त जगत् व्याप्त है , उस परमेश्वर की अपने स्वाभाविक कर्मों पूजा करके मनुष्य परम सिद्धि को प्राप्त हो जाता है। द्वारा SatlokAshramKUK wwwSupremeGod org Satlok Ashram Kurukshetra श्रीमद्धगवद्गीता उस परमेश्वर की भक्ति करो जिससे पूर्ण मुक्ति हो। वह परमात्मा पूर्ण ब्रह्म सतपुरुष (सत कबीर ) है। इसी का प्रमाण गीता जी के अध्याय नं. १८ के श्लोक नं. ४६ में हैः- प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम्। d: स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः 3ঁ নিমম अनुवादः जिस परमेश्वर से सम्पूर्ण प्राणियों की उत्पत्ति  हुई है यह समस्त जगत् व्याप्त है , उस परमेश्वर की अपने स्वाभाविक कर्मों पूजा करके मनुष्य परम सिद्धि को प्राप्त हो जाता है। द्वारा SatlokAshramKUK wwwSupremeGod org Satlok Ashram Kurukshetra - ShareChat