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माह-ए-रमज़ान में रंजिश भी मोहब्बत बन कर मुस्कुराती हुई इफ़्तार में आ जाती है ये जो हर बात पे तुम आह सी भरते हो 'नफ़स' इक 'अलामत है जो बीमार में आ जाती है #ramzan #deen ki baat